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Thursday, September 15, 2011

महंगाई के पेड़ को सींचती तेल कंपनियां

                                                  

          आतंक से जूझ रहा देश जब सरकार से कुछ कठोर कदमों की अपेक्षा कर रहा था, गृहमंत्री , सरकार की असफलता पर अफसोस ज़ाहिर करके चले गए..। दिन भर मीडिया उन पर बरसता रहा..। फिर अचानक, ऐसा कुछ हुआ, कि सुरक्षा के सवालों की गूंज शांत हो गई..। पेट्रोल के दाम बढ़ाए जाने का ऐलान हो गया..। आम ज़िंदगियों की हिफाज़त की फिक्र छोड़ कर, हिन्दुस्तान, आम आदमी की ज़िंदगी की फिक्र में खो गया..। 
         ये भी बम फटने जैसा ही है। पेट्रोल बम। दहशतगर्दों की ज़द में उतने लोग नहीं आते, जितने, महंगाई ने मार दिये हैं..। पेट्रोल के दाम बढ़ने का सीधा मतलब है, महंगाई का और बढ़ना। लगता है जैसे, तेल कंपनियां, महंगाई के पेड़ को सींच रही हैं।


                 

पहले से आसमान छू रही महंगाई, और ऊपर जाएगी। आम आदमी के हाथ और छोटे हो जाएंगे। रसोई गैस पर सब्सिडी भी खत्म हो रही है। और आरबीआई, ब्याज़ दरें बढ़ाने की सोच रही है। महंगाई दर डबल डिजिट आंकड़े को छू रही है। लेकिन, सरकार को फिक्र नहीं है।
                प्रणब मुखर्जी ने तो दो दिन पहले ही महंगाई पर सब्र रखने की सलाह देते हुए, दुनिया ही हालत पर दुख जता दिया था। अपनी 'ड्यूटी' उन्होंने एडवांस में ही निभा दी थी।
                दरअसल , इस वक्त सत्ता और विपक्ष, दोनों के ही पास समय नहीं है। दोनों ही 2014 के लिये अपने अपने उम्मीदवारों के चेहरे गढ़ने में व्यस्त हैं। बीजेपी मोदी की मूरत बना रही है, तो कांग्रेस, राहुल के खेवनहार बनाने के चक्कर में है। ये और बात है कि, दोनों ही नेता, जनता की कसौटी पर कबके फेल हो चुके हैं।
               साफ है , कि इस बार देश की गद्दी पर वही बैठेगा, भ्रष्टाचार, महंगाई, और आतंकवाद, तीनों से लड़ने में सक्षम होगा..। ये बात मैं अधिकार के साथ कह रही हूं.., क्योंकि मैं भी आम जनता हूं..।
                       




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