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Wednesday, September 7, 2011

सहानुभूति नहीं..सुरक्षा चाहिये




'आप लोग मुझे उनसे मिलने क्यों नहीं दे रहे?'...इस महिला का रोना सुन कर मन भर आया..। अंदर अस्पताल में इसका कोई अज़ीज़ भर्ती था..। मगर सुरक्षा कर्मी इसे भीतर नहीं जाने दे रहे थे..। क्योंकि भीतर..राहुल गांधी थे..। उनकी सुरक्षा का सवाल था..। दस सेकेंड की छोटी सी क्लिपिंग में देश की सबसे शर्मनाक तस्वीर दर्ज थी..। दहशतगर्द, देश के गुनाहगार हैं...। पर इन सफेदपोशों का क्या, जो बिना बंदूक-बिना गोली के, सीना छलनी कर देते हैं..? 
                    दिल्ली में धमाका हुआ..। ग्यारह लोग मारे गए, सत्तर से ज़्यादा घायल हो गए..। गृहमंत्री ने कहा- आतंकवादियों को बख्शा नहीं जाएगा, प्रधानमंत्री ने कहा- आतंकवादियों की ये हरकत, कायरतापूर्ण है..। दिल्ली की मुख्यमंत्री ने, मुआवज़े का ऐलान किया..। क्या इन सबके पास, सहानुभूति के अलावा कुछ और नहीं है देने को..? थ्री टीयर सुरक्षा और लाल बत्ती वाली गाड़ियों में घूमने वाले, क्या सचमुच आम आदमी के शरीर से बहे लाल खून का मतलब समझते हैं..? अगर समझते, तो तीन महीने पहले हुए दिल्ली हाइकोर्ट धमाके को हल्के में ना लिया होता..।


 




आतंकवादी तो पिछले कई सालों से देश को तोड़ना चाहते हैं..। लेकिन जब भी ऐसी घटना हुई है, उसके बाद देश और ज़्यादा एकजुट हो कर खड़ा हुआ है..। ज़्यादा बड़े गुनाहगार तो वो हैं, जो देश की सर्वोच्च संस्था पर कब्ज़ा किये बैठे हैं..। जिनकी लापरवाहियों का नतीजा है, कि ऐसे दहशतगर्द, बार-बार हमारे दामन को लहूलुहान कर जाते हैं..। 

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