ये लुटेरों की
बस्ती है
यहां भूख लुटती है
वो जिनके हाथ रंगे हुए हैं
रिश्ते नहीं..
बुत में दफनाए जाते हैं
मैं तो यहां ज़िन्दा हूं
क्योंकि रूह मार के बैठा हूं..
वो जो रूहों वाले थे
अब तक पछताए जाते हैं..
सब कुछ अपनी जेब में भरलो
लाशें..आंसू..आहें, जाते-जाते
तुम दफ्ना दो..
सारे किस्से और अफवाहें..
इस बस्ती का रहने वाला
कोई तुमको देख ना पाए
वरना तुम भी लुट जाओगे
देखो जल्दी से छुप जाना
रहे अंधेरा जब तक
अंधेरे में छिप कर ज़िंदा रह लो
यहां रौशनी कातिल है..
यहां दीया ना जलाना..
ये लुटेरों की बस्ती है....
यहां दीया ना
जलाना..
यहां भूख लुटती है
ईमान बिकते हैं
चिता जलाने के
लिये
घर फूंके जाते
हैं
वो जिनके हाथ रंगे हुए हैं
लाल खूं से.., वो मैयतों पर
कसीदे पढ़ने आते
हैं
मंदिर मस्जिद में रब नहीं
ज़मीन-ओ-जायदाद के मालिक रहते हैं
मिल्कियतें ..इनसान से बड़ी हैं
और इनसां..रोटी से छोटा,
एक-एक बोटी के लिये
झगड़ता..लड़ता..मरता
रिश्ते नहीं..
यहां सौदे निभाए जाते हैं
नफा-नुकसान सोच कर
रिश्ते बनाए जाते हैं
होली पर इंसानी फितरत
की रंगोली बनती है..
और दीवाली
मतलब के कंडील सजाए जाते हैं
इस बस्ती में रहने वाले
सारे यही समझते हैं
वही खुदा हैं ..और खुदाबुत में दफनाए जाते हैं
मैं तो यहां ज़िन्दा हूं
क्योंकि रूह मार के बैठा हूं..
वो जो रूहों वाले थे
अब तक पछताए जाते हैं..
सब कुछ अपनी जेब में भरलो
लाशें..आंसू..आहें, जाते-जाते
तुम दफ्ना दो..
सारे किस्से और अफवाहें..
इस बस्ती का रहने वाला
कोई तुमको देख ना पाए
वरना तुम भी लुट जाओगे
देखो जल्दी से छुप जाना
रहे अंधेरा जब तक
अंधेरे में छिप कर ज़िंदा रह लो
यहां रौशनी कातिल है..
यहां दीया ना जलाना..
ये लुटेरों की बस्ती है....
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| m f husain |

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