'..स्स्स्सा...ले..! तुझे समझ में नहीं आता एक बार में..?
मैं तेरी...$#@#%%*)(_))(*(&&^$%$@....!!!..'
एक स्कूल जाते बच्चे के मुंह से सुबह-सुबह ये अल्फाज़ सुन कर कैसा लगा होगा..? मेरी कॉलोनी के बाहर..एक फूल वाला बैठता है..। स्कूल यूनिफ़ॉर्म में कुछ बच्चे सुबह-सुबह उससे फूल खरीद रहे थे..। रोज़-डे पर शायद किसी क्लासमेट को देने के लिये..। पता नहीं किस बात पर उलझ पड़े..! मगर शुक्र है..फौरन शान्त भी हो गए। दो कदम चली...तो लाल बत्ती के नज़दीक..खून से सना एक शख्स..कभी रिक्शा वाले..तो कभी ऑटो वाले से बिठा लेने की प्रार्थना कर रहा था..। उसे देख कर अंदाज़ा हो रहा था.., कि रात किसी से मारपीट हुई है उसकी..। कान और चेहरे पर लगा खून..सूख गया था..। शायद रात भऱ कहीं बेहोश पड़ा रहा वो..। मगर कोई भी रिक्शा वाला..या ऑटो वाला..उसे बिठाने को तैयार नहीं हुआ..। सब डर रहे थे..। कहीं मदद करते-करते..लेने के देने न पड़ जाएं..।
ऐसा लगा..जैसे..कॉलोनी के बाहर खड़े बच्चों का ही भविष्य..आगले मोड़ पर टकरा गया..। बड़ी डरावनी कल्पना थी..। काश...कभी सच न हो..।
ऑफिस से लौटने में आज देर हो गई..। मेट्रो..पच्चीस मिनट देरी से चल रही थी..। बाहर तेज़ बारिश..और अंदर भयंकर भीड़..। साधारण बोगी से फैलते-फैलते.., पुरुषों का रेला..महिला कंपार्टमेंट तक आ पहुंचा था..। पता नहीं किस महिला ने..पुलिस को फोन करके शिकायत कर दी..। उसे महिला कंपार्टमेंट में पुरुषों का खड़ा होना नापसंद था..। और थोड़ी ही देर में ., कुछ पुलिस वाले..पुरुषों को निकालने के लिये डब्बे में चढ़े..। खूब बहस हुई..। और लोगों ने लगभग धकेल कर.पुलिस वालों को..बोगी से नीचे उतार दिया..। उतनी देर तक..न मेट्रो सरकी.., न ही आवाज़ें शांत हुईं..।
आज के दिन की शुरुआत..और अंत..दोनों ही अजीब से थे..। अशांत..। ऐसे लग रहा था..मानो.., आने वाला कल..चेतावनी दे रहा है..। सभ्यता क्या उलटी दिशा में बढ़ रही है..? जंगलों से निकल कर..इंसान कंकरीट के जंगलों में बसने लगा ..। मगर फितरत नहीं बदली..। जंगलीपना नहीं गया..। ज़रा-ज़रा सी बात पर..अंदर का जानवर, बाहर निकल पड़ता है..। इंसान होना काफी मुश्किल है शायद..।
मेट्रो की उसी बोगी में.., मेरी बगल वाली सीट पर एक लड़की बैठी थी..। मेरे साथ-साथ..उसे भी ये बात नहीं भाई थी.., कि इतनी भीड़..और खराब मौसम की स्थिति में..,महिला बोगी के किनारे खड़े हो कर घर पहुंचने की कोशिश करते पुरुषों को यात्रा न करने दी जाए..। उसी बोगी में थोड़ी देर बाद..एक नेत्रहीन युवक चढ़ा..। किसी तरह खुद को संभालने की कोशिश करते उस युवक को देख कर..वो लड़की फौरन उठी..। बांह पकड़ कर उसे लाई..और अपनी सीट पर बिठा कर खुद खड़ी हो गई..। जंगलियों की भीड़ में ..दिन भर में यही एकमात्र इंसान टकराई थी मुझसे ..। चलो..कम से कम..उम्मीद तो बरकरार है..। रात के एक बज कर पच्चीस मिनट हो गए हैं..। मुझे लगता है..सोने की कोशिश करनी चाहिये..। कल वसंत पंचमी है..। देखें..कल ज़िन्दगी..क्या नया रंग दिखाती है..।
"ज़रा-ज़रा सी बात पर..अंदर का जानवर, बाहर निकल पड़ता है.. इंसान होना काफी मुश्किल है
ReplyDelete.....
कम से कम..उम्मीद तो बरकरार है.."
सीधे और सही शब्दों में बड़ी बात
ReplyDeleteएक बात आपने गौर नहीं किया,
यह जँगलीपन यह वहशियाना रुख एक तरह का विकार है,
दिल्ली क्या हर जगह आदमी यही दम भरता फिरता है, तुम जानते नहीं मैं कौन हूँ ।
अँदाज़े बयाँ अच्छा है, आप लिखती रहें, हम पढ़ेंगे ज़रूर :) शुभकामनायें !
शुक्रिया।
ReplyDeleteआदरणीय राजेश कौशिक जी, डॉ. अमर कुमार जी, समय जी...
ReplyDeleteहौसला बढ़ाने के लिये बहुत आभार। मेरा आप सबसे ये प्रथम परिचय है। मार्गदर्शन भी चाहिये, और आशीर्वाद भी..।
एक इंसान तो मिला आपको. स्वागत.
ReplyDeletePls remove unnecessary word verification.
सदाबहार देव आनंद
बहूमूल्य सलाह के लिये धन्यवाद अभिषेक जी । आपकी टिप्पणियां, मुझे लेखन सीखने में सहायक होंगी।
ReplyDeleteएक इंसान तो मिला आपको|धन्यवाद|
ReplyDeleteबसंत पंचमी की शुभकामनाएँ|
@ patali-the village- मित्रवर..ये इंसान न मिला होता..तो इतने सारे नए मित्रों से परिचय भी नहीं होता। मुझे भी उस इंसान का शुक्रिया करना चाहिये। आपको भी वसंत पंचमी की शुभकामनाएं..।
ReplyDeleteआदरणीय डॉ. मीणा जी,
ReplyDeleteआपकी शुभकामनाओं और आशीर्वाद के लिये आभार। मैं प्रयास करूंगी कि,आप सभी गुणीजनों की आशाओं पर खरी उतरूं। मेरी कलम से निकला हुआ कोई भी शब्द, अगर समाज के लिये कतरा भर भी योगदान दे सका, तो स्वयं को धन्य समझूंगी।
गुंजन
सीनियर प्रोड्यूसर
जीएनएन न्यूज़
नई दिल्ली।
@sushil ji.... आपकी शुभकामनाओं और मार्गदर्शन के लिये बहुत बहुत धन्यवाद..। आपके लिंक को ज़रूर फॉलो करूंगी..। आप भी 'कहेंगे ज़रूर' को फॉलो करें.., और अपने विचार सांझा करते रहें..।
ReplyDeleteसधन्यवाद
गुंजन
इस सुंदर से चिट्ठे के साथ आपका हिंदी ब्लॉग जगत में स्वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!
ReplyDelete@sangita ji...आपकी शुभकामनाओं के लिये बहुत बहुत धन्यवाद । आशा करती हूं आगे भी आपसे मार्गदर्शन मिलता रहेगा।
ReplyDeleteगुंजन
@Harish ji..भारतीय ब्लॉग लेखक मंच को मेरी ओर से होली की बहुत बहुत शुबकामनाएं। उम्मीद करती हूं, कि आपका मार्गदर्शन मिलता रहेगा।
ReplyDeleteगुंजन