पूछ मत.. क्या थी वो आवाज़ कल रात
मैंने आकाश खटखटकाया था..
देखना था, कौन खोलेगा क्षितिज..
मैंने आकाश खटखटकाया था..
वो अंधेरा है..या है रौशनी..,
कभी रात..कभी दिन जो बन जाता है..
कहां से लाता है हर रोज़ सूरज..,
कैसे हर रोज़ चांद उगाता है..?
कौन देता है पंख मेघों को
और सतरंग कौन बुनता है..?
कौन रचता है राग बारिश के..,
कौन गीतों में हवा गुनता है..?
जब कभी मैं उदास होती हूं..
कौन खिड़की से झांक लेता है..?
और ठंडी हवा के झोंके सा..
मेरा मन कौन ढांप लेता है..?
उसकी बेरंगियों में जो रंग हैं..
उनमें वो चेहरे कौन भरता है..?
खुद जो बेशक्ल है..सदा से, भला..
उसमें वो अक़्स क्यों उभरता है..?
मैं जो लिखती हूं उसे राज़ अपने
चिट्ठियां मेरी कहां रखता है..?
उसके सीने में और क्या क्या है..
दर्द किस किस का जमा करता है..?
मैंने सोचा ज़रा मैं देखूं तो..
उसको शायद मेरी ज़रूरत हो..!
था बड़ा शोर उसकी चुप्पी में..
इसलिये ..मैंने आकाश खटखटकाया था.....

मैंने आकाश खटखटकाया था..
देखना था, कौन खोलेगा क्षितिज..
मैंने आकाश खटखटकाया था..
वो अंधेरा है..या है रौशनी..,
कभी रात..कभी दिन जो बन जाता है..
कहां से लाता है हर रोज़ सूरज..,
कैसे हर रोज़ चांद उगाता है..?
कौन देता है पंख मेघों को
और सतरंग कौन बुनता है..?
कौन रचता है राग बारिश के..,
कौन गीतों में हवा गुनता है..?
जब कभी मैं उदास होती हूं..
कौन खिड़की से झांक लेता है..?
और ठंडी हवा के झोंके सा..
मेरा मन कौन ढांप लेता है..?
उसकी बेरंगियों में जो रंग हैं..
उनमें वो चेहरे कौन भरता है..?
खुद जो बेशक्ल है..सदा से, भला..
उसमें वो अक़्स क्यों उभरता है..?
मैं जो लिखती हूं उसे राज़ अपने
चिट्ठियां मेरी कहां रखता है..?
उसके सीने में और क्या क्या है..
दर्द किस किस का जमा करता है..?
मैंने सोचा ज़रा मैं देखूं तो..
उसको शायद मेरी ज़रूरत हो..!
था बड़ा शोर उसकी चुप्पी में..
इसलिये ..मैंने आकाश खटखटकाया था.....
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