'तू चीज़ बड़ी है मस्त मस्त....तू चीज़ बड़ी है मस्त मस्त....'- टीवी पर गाना चल रहा है । एक अंग्रेज़ी न्यूज़ चैनल है..नाम नहीं लूंगी । प्रोग्राम है नब्बे के दशक के हिट गानों पर । और भी कई गानों की बात हो रही है..मगर इस गाने को बिना काटे..पूरा दिखाया गया । अगला गाना- 'जोरा जोरी चने के खेत में..'। ये गाना भी पूरा चला है ।... अब कोई प्रोग्राम देखे .. ना देखे.., गाना तो देख ही लेगा !
टीआरपी का सवाल है भाई, क्या करें..मजबूरी ठहरी.. ! बेचारे प्रोड्यूसर से जवाब मांगा जाता है । न्यूज़ चैनलों पर जो कॉन्टेंट ऑन एयर होता है.., उस पर सेंसर नहीं होता । छोटी थी.., तो पापा कहते थे- बेटा न्यूज़ चैनल देखे करो । अब मैं खुद न्यूज़ चैनल में काम करती हूं । पर मुझे यकीन नहीं, कि मैं अपने बच्चों से ये बात , उसी आत्मविश्वास से कह पाऊंगी ।
मनोरंजन चैनलों से कहीं ज़्यादा ड्रामा न्यूज़ चैनलों की स्क्रीन पर, और, स्क्रीन के पीछे होता है ।
आप सोच रहे होंगे..आज मुझे हो क्या गया है, न्यूज़ चैनलों को क्यों कोस रही हूं..। सच बताइयेगा..आप भी कभी कभार ऐसा करते हैं..हैं ना..?!?! आप ऐसा उस वक्त करते हैं..जब "ऐसी" किसी खबर(?) के दौरान..अचानक बहन या मां कमरे में आ जाते हैं । या फिर ... अपराध की वीभत्स कल्पनाओं से भरे किसी शो के वक्त..आपका बेटा पूछ बैठता है- पापा..ये बलाक्तार क्या होता है..?
पिछले दिनों एक खबर टीवी पर खूब छाई रही..अन्ना हज़ारे का अनशन । बड़ी संख्या में लोगों ने अन्ना को समर्थन दिया । खूब भावुक हो कर टीवी चैनलों ने कई घन्टों तक लाइव दिखाया । बाद में एक न्यूज़ चैनल की एंकर..किसी से बतियाती मिली- 'अरे..ऐसे मौके तो हमारे लिये फेस्टिवल होते हैं फेस्टिवल । ब़डा मज़ा आता है यार । पूरा पूरा दिन हम लाइव रहते हैं । वरना नॉर्मल दिनों में कहां इतने बुलेटिन मिलते हैं करने को..'। जन लोकपाल बिल से देश का भला हो ना हो.., अन्ना के अनशन से..उन मोहतरमा का तो भला ज़रूर हुआ..। बेशक..टीवी चैनलों का भी हुआ । कम से कम, कुछ घन्टों के लिये ही सही, सारे न्यूज़ चैनलों पर, सिर्फ और सिर्फ, देश की बात हो रही थी..देश के भले की बात हो रही थी..।
No comments:
Post a Comment